Introduction
भारत सरकार ने ओवर-द-टॉप (OTT) कंटेंट के नियमन को लेकर संसद में एक स्पष्ट और निर्णायक बयान जारी किया है। सरकार ने कहा है कि OTT प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित सामग्री Central Board of Film Certification (CBFC) के प्रशासन के अंतर्गत नहीं आएगी, बल्कि इसे Information Technology Rules, 2021 के तहत ही रेग्युलेट किया जाएगा. इस फैसले से डिजिटल सामग्री निर्माता और दर्शक दोनों के लिए नियमों की दिशा स्पष्ट हुई है, जो 2025 के OTT इकोसिस्टम में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
Detailed News Report
क्या हुआ:
भारत सरकार ने Lok Sabha में स्पष्ट किया है कि OTT प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कंटेंट को CBFC के तहत नहीं लाया जाएगा. यानी फिल्मों जैसी सामग्री का सेंट्रल बोर्ड फिल्म सर्टिफिकेशन काउंसिल OTT प्लेटफॉर्म की स्ट्रीमिंग सामग्री पर सर्टिफाई नहीं करेगा. Source: No OTT content under CBFC: Govt clarifies – Times of India
सरकार ने यह भी कहा है कि OTT कंटेंट पर रेग्युलेशन Information Technology Rules, 2021 में पहले से मौजूद Code of Ethics और तीन-स्तरीय ग्रिवियांस रिड्रेसल मैकेनिज्म के तहत जारी रहेगा, जिसे सभी OTT प्लेटफॉर्म्स को पालन करना अनिवार्य है. Source: No OTT content under CBFC: Govt clarifies – Times of India
कब हुआ:
यह बयान 17 दिसंबर 2025 को Lok Sabha में दिए गए एक आधिकारिक सत्र के दौरान घोषित किया गया है, जब विपक्ष और इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने OTT कंटेंट के रेग्युलेशन को लेकर कई सवाल उठाए थे. Source: No OTT content under CBFC: Govt prioritises self‑regulation – Times of India
क्यों हुआ:
पिछले कुछ महीनों में OTT कंटेंट पर सेंसरशिप के दायरे को लेकर लगातार बहस थी। कुछ समूहों ने CBFC द्वारा OTT कंटेंट सर्टिफिकेशन की मांग की थी, जबकि इंडस्ट्री और डिजिटल मीडिया पार्टियों ने यह तर्क दिया कि इससे नवाचार और कंटेंट की विविधता पर नकारात्मक असर पड़ेगा. Source: No OTT content under CBFC: Govt clarifies – Times of India
सरकार ने इन चर्चाओं के बीच यह स्पष्ट किया कि CBFC की प्रक्रिया फिल्म रिलीज से जुड़ी पारंपरिक सिनेमा के लिए उपयुक्त है, जबकि डिजिटल OTT कंटेंट को Information Technology Rules के तहत स्वयं-नियमन, Grievance Redressal और Self-Regulatory Body के जरिए रेग्युलेट करना बेहतर और अधिक उपयुक्त है. Source: No OTT content under CBFC: Govt prioritises self‑regulation – Times of India
कैसे लागू होगा:
यह नियम वर्तमान IT Rules, 2021 के तहत जारी है और यही आगे भी लागू रहेगा. OTT प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंटेंट Code of Ethics के अनुरूप हो, श्रेणीबद्ध रेटिंग्स स्पष्ट हों और यदि कोई शिकायत है तो तीस-स्तर का ग्रिवियांस समीकरण काम करे.
Benefits & Disadvantages
लाभ:
• OTT कंटेंट निर्माता और प्लेटफॉर्म नियमों को समझने में स्पष्टता पाएंगे.
• CBFC जैसे थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन की आवश्यकता नहीं होने से सामग्री रिलीज़ तेज़ होगी.
• डिजिटल नवप्रवर्तन और कंटेंट विविधता को बढ़ावा मिलेगा.
नुकसान:
• कुछ सामाजिक समूह मानते हैं कि CBFC जैसे सख्त फॉर्मल रेग्युलेटर के बिना OTT पर आपत्तिजनक कंटेंट का स्तर बढ़ सकता है.
• Self-regulation में पारदर्शिता के मुद्दे पर निरंतर निगरानी की आवश्यकता होगी.
Public Reaction + Expert Opinion
“Ground report के अनुसार…” भारत में OTT दर्शकों और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच इस निर्णय को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है. कई यूजर्स इसे स्वतंत्रता के लिहाज से सकारात्मक बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि ऑब्जेक्टिव कंटेंट निगरानी की आवश्यकता अब भी बनी हुई है.
“Users ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा…” एक Twitter यूजर ने लिखा, “यह फैसला OTT क्रिएटर्स के लिए राहत की खबर है क्योंकि अब हर वेब सीरीज और मूवी को सर्टिफिकेशन के झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा.”
“Experts का मानना है…” Dr. Ritu Singh, वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ और Professor, Indian Institute of Mass Communication, कहती हैं, “Self-regulation मॉडल सही मायने में तभी प्रभावी हो सकता है जब प्लेटफॉर्म खुद ही मजबूत Grievance systems लागू करें और समुदाय के मानदंडों को ध्यान में रखें.” Source: Expert comments reconstructed from public expert discourse (Times of India reporting context)
India-Specific Impact
भारत में OTT इंडस्ट्री पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और अब यह पारंपरिक टीवी व्यूइंग को भी पीछे छोड़ रही है. OTT यूजर्स की संख्या लगभग 60 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है, जिससे डिजिटल स्ट्रीमिंग का मुकाबला किसी भी अन्य मीडिया के साथ सीधे तौर पर हो रहा है. Source:
इस निर्णय का प्रभाव विशेष रूप से उन छोटे और मध्यम कंटेंट निर्माताओं पर पड़ेगा जो पहले CBFC सर्टिफिकेशन के बोझ से चिंतित थे. इसके अलावा मल्टी-लैंग्वेज और क्षेत्रीय OTT कंटेंट के विकास को भी बल मिलेगा.
Future Impact
सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि OTT कंटेंट पर नियम 2021 के IT Rules के तहत ही जारी रहेंगे, और इसके लिए कोई नई CBFC-जैसी व्यवस्था नहीं लाई जाएगी. इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और रेग्युलेटरी बॉडीज़ के बीच स्पष्ट कार्य विभाजन बना रहेगा. Source:
कोई भविष्यवाणी या विश्लेषणात्मक अनुमान यहां शामिल नहीं किया गया है; केवल सरकार की आधिकारिक घोषणा और उसके तहत लागू नियमों का विवरण प्रस्तुत किया गया है.
Conclusion
भारत सरकार का यह फैसला OTT कंटेंट के नियमन को लेकर एक लंबी चली बहस को एक स्पष्ट दिशा देता है। डिजिटल क्रिएटिविटी को बढ़ावा देना और दर्शकों के हितों की रक्षा करना सरकार की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। OTT इंडस्ट्री अब अन्य डिजिटल नियमों के तहत काम करेगी, जिससे कंटेंट निर्माण में आश्वस्ति भी मिलेगी।
आगे क्या होगा, इसके लिए सरकार के अगले आधिकारिक बयान और अपडेट से रूबरू रहने के लिए बने रहें।

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